Top 10 reason to celebrate Rakshabandhan festival | रक्षाबंधन क्यों मनाते है, इसके 10 बड़े वजह क्या है

rakhi festival

रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्यौहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पुर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबंधन भाई बहनो के बीच मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन बहन अपने भाइयों को रक्षाधागा बाधती हैं और भाई अपनी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। हर वर्ष यह त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार अलग अलग तिथि को मनाया जाता है। 2022 में यह त्यौहार कब है और किस तारीख को मनाया जायेगा इस आर्टिकल में पूरी जानकारी मिलेगी साथ ही यह भी जानेँगे की शुभ मुहूर्त कब है और उसका समय कबसे कब तक होगा।  

2022 में रक्षाबंधन किस तारीख को है और शुभ मुहूर्त कब है । About Rakshabandhan festival in hindi

राखी का त्यौहार 2022 में केलिन्डर के अनुसार  11 अगस्त को है अगर शुभ मुहूर्त की बात करे तो 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर प्रारम्भ होगी और 12 अगस्त को सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी लेकिन ज्योतिषाचार्यो के अनुसार 11 अगस्त को सुबह से रत 8:00 बजकर 51 मिनट तक भद्रा काल रहेगा और रत के समय सूर्यास्त के बाद हिन्दुओ में कोई भी सुबह काम नहीं किया जाता इसलिए 12 अगस्त को रक्षाबंधन मानना शुभ माना जा रहा है। रक्षाबंधन मनाने से संबंधित कई किस्से और वजह है आइये उन 10 वजह के बारे में जाने जिनके वजह से रक्षाबंधन मनाया जाता है।
Why we celebrate  Rakshabandhan festival | रक्षाबंधन क्यो मनाया जाता हैं

राखी पर्व मनाने के 10 बड़े वजह क्या है जाने | Reason to celebrate Rakshabandhan

1. इन्द्र् देव सम्बंधित : पुराणों के अनुसार दैत्यों और देवताओं के मध्य होने वाले एक युद्ध में भगवान इंद्र को एक असुर राजा, राजा बलि ने हरा दिया था. इस समय इंद्र की पत्नी सची ने भगवान विष्णु से मदद माँगी. भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया. इस वलय को भगवान विष्णु ने पवित्र वलय कहा. सची ने इस धागे को इंद्र की कलाई में बाँध दिया तथा इंद्र की सुरक्षा और सफलता की कामना की. इसके बाद अगले युद्द में इंद्र बलि नामक असुर को हारने में सफ़ल हुए और पुनः अमरावती पर अपना अधिकार कर लिया. यहाँ से इस पवित्र धागे का प्रचलन आरम्भ हुआ. इसके बाद युद्द में जाने के पहले अपने पति को औरतें यह धागा बांधती थीं. इस तरह यह त्योहार सिर्फ भाइयों बहनों तक ही सीमित नहीं रह गया।

2. राजा बलि और माँ लक्ष्मीभगवत पुराण और विष्णु पुराण के आधार पर यह माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने राजा बलि को हरा कर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, तो बलि ने भगवान विष्णु से उनके महल में रहने का आग्राह किया. भगवान विष्णु इस आग्रह को मान गये। हालाँकि भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी को भगवान विष्णु और बलि की मित्रता अच्छी नहीं लग रही थी, अतः उन्होंने भगवान विष्णु के साथ वैकुण्ठ जाने का निश्चय किया। इसके बाद माँ लक्ष्मी ने बलि को रक्षा धागा बाँध कर भाई बना लिया। इस पर बलि ने लक्ष्मी से मनचाहा उपहार मांगने के लिए कहा। इस पर माँ लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि वह भगवान विष्णु को इस वचन से मुक्त करे कि भगवान विष्णु उसके महल मे रहेंगे। बलि ने ये बात मान ली और साथ ही माँ लक्ष्मी को अपनी बहन के रूप में भी स्वीकारा

3. कृष्ण और द्रौपदी सम्बंधित : महाभारत युद्ध के समय द्रौपदी ने कृष्ण की रक्षा के लिए उनके हाथ मे राखी बाँधी थी। इसी युद्ध के समय कुंती ने भी अपने पौत्र अभिमन्यु की कलाई पर सुरक्षा के लिए राखी बाँधी।

4. संतोषी माता : विष्णु के दो पुत्र हुए शुभ और लाभ। इन दोनों भाइयों को एक बहन की कमी बहुत खलती थी, क्यों की बहन के बिना वे लोग रक्षाबंधन नहीं मना सकते थे। इन दोनों भाइयों ने भगवान गणेश से एक बहन की मांग की। कुछ समय के बाद भगवान नारद ने भी गणेश को पुत्री के विषय में कहा। इस पर भगवान गणेश राज़ी हुए और उन्होंने एक पुत्री की कामना की। भगवान गणेश की दो पत्नियों रिद्धि और सिद्धि, की दिव्य ज्योति से माँ संतोषी का अविर्भाव हुआ। इसके बाद माँ संतोषी के साथ शुभ लाभ रक्षाबंधन मना सके।

5. यम और यमुना सम्बंधित : एक अन्य पौराणिक कहानी के अनुसार, मृत्यु के देवता यम जब अपनी बहन यमुना से 12 वर्ष तक मिलने नहीं गये, तो यमुना दुखी हुई और माँ गंगा से इस बारे में बात की। गंगा ने यह सुचना यम तक पहुंचाई कि यमुना उनकी प्रतीक्षा कर रही हैं। इस पर यम युमना से मिलने आये। यम को देख कर यमुना बहुत खुश हुईं और उनके लिए विभिन्न तरह के व्यंजन भी बनायीं। यम को इससे बेहद ख़ुशी हुई और उन्होंने यमुना से कहा कि वे मनचाहा वरदान मांग सकती हैं। इस पर यमुना ने उनसे ये वरदान माँगा कि यम जल्द पुनः अपनी बहन के पास आयें। यम अपनी बहन के प्रेम और स्नेह से गद गद हो गए और यमुना को अमरत्व का वरदान दिया। भाई बहन के इस प्रेम को भी रक्षा बंधन के हवाले से याद किया जाता है।

6. रानी कर्णावती और हुमायूँएक अन्य ऐतिहासिक गाथा के अनुसार रानी कर्णावती और मुग़ल शासक हुमायूँ से सम्बंधित है। सन 1535 के आस पास की इस घटना में जब चित्तोड़ की रानी को यह लगने लगा कि उनका साम्राज्य गुजरात के सुलतान बहादुर शाह से नहीं बचाया जा सकता तो उन्होंने हुमायूँ, जो कि पहले चित्तोड़ का दुश्मन था, को राखी भेजी और एक बहन के नाते मदद माँगी। हालाँकि इस बात से कई बड़े इतिहासकार इत्तेफाक नहीं रखते, जबकि कुछ लोग पहले के हिन्दू मुस्लिम एकता की बात इस राखी वाली घटना के हवाले से करते हैं।

7.  सिकंदर और राजा पुरुएक महान ऐतिहासिक घटना के अनुसार जब 326 ई पू में सिकंदर ने भारत में प्रवेश किया, सिकंदर की पत्नी रोशानक ने राजा पोरस को एक राखी भेजी और उनसे सिंकंदर पर जानलेवा हमला न करने का वचन लिया। परंपरा के अनुसार कैकेय के राजा पोरस ने युद्ध भूमि में जब अपनी कलाई पर बंधी वह राखी देखी तो सिकंदर पर व्यक्तिगत हमले नहीं किये।

8. 1905 का बंग भंग और रविन्द्रनाथ टैगोरभारत में जिस समय अंग्रेज अपनी सत्ता जमाये रखने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की पालिसी अपना रहे थे, उस समय रविन्द्रनाथ टैगोर ने लोगों में एकता के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाया। वर्ष 1905 में बंगाल की एकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार बंगाल को विभाजित तथा हिन्दू और मुस्लिमों में सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश करती रही। इस समय बंगाल में और हिन्दू मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए और देश भर में एकता का सन्देश देने के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन का पर्व मनाना शुरू किया।

9. सिखों से संबंधित: महाराजा रणजीत सिंह जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की, की पत्नी महारानी जिन्दान ने नेपाल के राजा को एक बार राखी भेजी थी। नेपाल के राजा ने हालाँकि उनकी राखी स्वीकार कर ली किन्तु, नेपाल के हिन्दू राज्य को देने से इनकार कर दिया।

10. राजपुतो सेे संबंधित: पहले राजपूूत जब लड़ाई पर जाते थे तो जाने से पहले महिलाये उन्हें कुमकुम तिलक माथे पर लगाकर रेशमी धागा बांधती थी इस विश्वास के साथ कि वो विजयी होकर लौटे। 

निष्कर्ष :-  इस आर्टिकल में धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर्व क्यों मनाते है और इसके पीछे वजह क्या है इस आर्टिकल में Top 10 जानकारी के माध्यम से बताया गया है। साथ ही वर्तमान वर्ष 2022 में रक्षाबंधन पर्व किस तारीख को है और शुभ मुहूर्त कब है तथा समय कबसे कब तक है इसकी जानकारी दी गयी है।  

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